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अत्यधिक तापमान तथा स्थानीय एवं क्षेत्रीय वायु विक्षोभ की देन है यह मौसम : डा० गणेश पाठक

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उत्तर प्रदेश जनपद बलिया
द्वारा
दैनिक मधुर दर्पण समाचार
जिला ब्यूरो हिमांशु शेखर

उत्तर प्रदेश जनपद बलिया :–पर्यावरणविद्
कल से ही मौसम में जो उतार – चढ़ाव चल रहा है, वास्तव में मानसून के दस्तकसे उसका कोई संसबं नहीं है। इस क्षेत्र में अभी प्रीमानसून की भी स्थिति नहीं बनी है, क्यों कि प्रीमानसून मानसून आने से एक सप्ताह पूर्व आता है और बलिया या पूर्वांचल में मानसून 22 जूनसे 25 जून के मध्य आने की संभावना है।

वास्तव में आजकल मौसम में जो बदलाव आया है, वह स्थानीय विक्षोभ की देन है। कई दिनों से भयंकर गर्मी पड़ने के कारण स्थानीय स्तर पर वायुदाब एवं तापमान में बदलाव आता है। अधिक ताप के कारण हवा गर्म होकर ऊपर उठती है ,जिससे वहाँ का स्थान वायु से रिक्त हो जाता है ।उस रिक्त स्थान की पूर्ति हेतु आस- पास की हवा तेजी से रिक्त स्थान की तरफ लपकती है और वह भी ताप से गर्म हौकर ऊपर उठती जाती है ।जब जह क्रम कई बार होता है तो वायु में एक भँवर की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और वायु में तेज वेग आ जाने के कारण बवंडर उत्पन्न हो जाता है। यदि ऐसी स्थिति बिल्कुल स्थानीय स्तर पर उत्पन्न होती है तो बस बवंडर आ कर रह जाता है, किंतु अगर यह प्रक्रिया क्षेत्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर होती है तो चक्रवातीय स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे हल्के से लेकर तेज आँधी- पानी आता है। वायुमण्डल में स्थित नमी या वायु में स्थित नमी बादलों का रूप ग्रहण करती है और संघनित होकर वर्षा हो जाती है। ऐसे आँधी- तूफानों में वायु की गति प्रायः 20- 40 किमी० प्रतिघंटा तक होती है, किंतु कभी – कभी तेज गति से भी आँधी आती है।

इस समय के ऐसे मौसम में बादलों की गड़गड़ाहट एवं बिजली की चमक भी तेज होती है और वज्रपात भी हो जाता है, जिससे धन- जन दोनों की क्षति होती है। वायु विक्षोभ के कारण वायुमण्डल में विपरीत दिशाओं से आने वाले बादल आपस में टकराते है, जिससे आकाशीय बिजली की उत्पत्ति होती है और जब यह आकाशीय बिजली विद्युत धारा प्रवाह के रूप में धरातल पर आती है तो जहाँ भी यह गिरती है , वहाँ के जीव- जंतु, मानव या पेड़- पौधों को झुलस कर रख देती है और मृत्यु तक भी हो जाती है। इसलिए ऐसे आँधी- पानीक्षके समय घरों से नहीं निकलना चाहिए और न ही खुले स्थान में या पेड़ के नीचे, अथवा विद्युत पोल या तार के नीचे , करकट के नीचे नहीं रहना चाहिए।

कल और आज के मौसम के व्यवहार एवं तेवर को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि ऐसी स्थिति अभी दो दिनों तक बनी रह सकती है।

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