पुलिस स्मृति दिवस पर विशेष :हमें सुरक्षित समाज और भयमुक्त वातावरण देने के लिए “थैंक्यू पुलिस” : राजेश खुराना

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दुःख हो या सुख, 100 नम्बर पर कॉल करने पर हर संकट में काम आती हैं पुलिस : राजेश खुराना

उत्तर प्रदेश जनपद आगरा
द्वारा
दैनिक मधुर दर्पण समाचार
इनपुट : सचिन सिंह

उत्तर प्रदेश जनपद आगरा :–देश की सीमा की रक्षा में लगे सैन्य बलों के बलिदान की आपने कई कहानियां सुनी होंगी लेकिन हमारे पुलिसकर्मियों के शौर्य और बलिदान का इतिहास भी किसी से कम नहीं है। “नेशनल पुलिस डे यानी पुलिस स्मृति दिवस” हमारे पुलिसकर्मियों के शौर्य, बलिदान और शहीदों के सम्मान में हर साल 21 अक्टूबर को मनाया जाता हैं।

हिन्दू जागरण मंच, ब्रज प्रान्त उ.प्र. के प्रदेश संयोजक एवं आत्मनिर्भर एक प्रयास के चेयरमैन व सुप्रशिद्ध समाजसेवक राजेश खुराना पत्रकार वार्ता में बताया कि “हम प्रायः पुलिसकर्मी को अपना फर्ज पूरा करते देखते रहते हैं और अक्सर हम उनकी आलोचना करते हैं। उन पर आरोप भी लगाते हैं जिनमें से कुछ सच भी साबित हो जाते हैं, कुछ गलत, पर हम भूल जाते हैं कि ये लोग कितना कठिन कार्य करते हैं। आज हमें उनकी सेवा के उस नजरिए को देखना है, जिसमें वो दूसरों की जान व माल की रक्षा के बदले अपनी जिन्दगी से समझौता कर लेते हैं।’’ पुलिस स्मृति दिवस पर हम गर्व से कहते की पुलिस है, तो समाज की कल्पना है। हम सभी को भयमुक्त समाज के निर्माण और अप्रराध को कम करने के लिए पुलिस और प्रशासन को सहयोग देना चाहिए, आखिर पुलिस वाले भी तो हम सभी के परिवार से ही तो आते हैं, पुलिस शत्रु, नही मित्र व रक्षक है। कोरोना काल में जब लोग डर से अपने घरों में थे। जब मौत के तांडव के डर से मुह छिपा लिया था वही, पुलिस इंसानियत का फर्ज़ निभा रही थी। पुलिसवालों ने अपने प्राणो की बाजी लगाकर कानून व्यवस्था संभालने के साथ – साथ निःस्वार्थ मानवसेवा भी की जो सदैव पुलिस के इतिहास में अविस्मरणीय व स्वर्णिम अक्षरों में पुलिस की सर्वश्रेष्ठ सेवाओ में होगा। आज विडंबना देखिए कि कुछ गिने चुने लोगों की वजह से, समूचे पुलिस विभाग को बदनाम किया जाता है। अगर पुलिस न होती तो समाज की कल्पना करिए बिना पुलिस के समाज की कल्पना मात्र करने से रूह काँप उठती है। जो लोग पूरे महकमे पर आरोप लगाते हैं, वो कभी पुलिस की तरह समाज के लिए बलिदान दें,ये पुलिस ही है जो देश के अंदर कानून व्यवस्था बनाए रखने में अपना सर्वस्व व प्राणो का बलिदान देती है।

श्री खुराना ने कहा कि इस दिवस को मनाने का उद्देश्य यह हैं कि एक आम नागरिक पुलिस को नजदीक से जान सके और बहादुर नौजवानों को इस सेवा से जुड़ने के लिए कैसे उत्साहित कर पाएँ। हमारे लिए बहुत ज़रूरी है कि हम उन रास्तों को हमेशा याद रखें जिन पर चलकर हमें ये मालूम हुआ है कि एक राष्ट्र के रूप में हम कौन हैं और क्या हैं ? हर राज्य का पुलिस बल उन बहादुर पुलिस वालों की याद में इस दिवस का आयोजन करता है, जिन्होंने जनता एवं शांति की रक्षा के लिए अपना जीवन कुर्बान कर दिया। ज्यादातर यही होता है कि इन परेडों में लोगों की उपस्थिति बहुत कम होती है। पुलिस द्वारा आयोजित परेडों की वह गवाह है। देश के 13 लाख से ज्यादा पुलिस कर्मियों के इस महत्त्वपूर्ण दिन को हम कैसे नकार सकता है ? देश मे प्रतिवर्ष लगभग 1000 पुलिसकर्मी अपना फर्ज निभाते हुए शहीद होते हैं, लेकिन इनमें से किसी को भी अपने कार्यों और फर्ज को अंजाम देते हुए शहीद हो जाते हैं ज्यादा सराहना नहीं मिलती, न ही उनके बलिदानों की कहानी लोगों तक पहुँचती है। पुलिस स्मृति दिवस पर आज हम सभी शहीद पुलिस कर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुये उन सभी हिम्मत से अपराध से लड़ रहे पुलिस व अधिकारी एवं कर्मियों के जज्बे को बारम्बार नमन करते है। जय हिन्द।

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