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ग्रामीण महिलाएं बना रही मास्क
एनआरएलएम ग्रामीण महिलाओं से बनवा रहा मास्क….

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उत्तर प्रदेश लखनऊ
द्वारा
दैनिक मधुर दर्पण समाचार
ब्यूरो जितेंद्र यादव


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शुरू हुआ यह कार्य।

उत्तर प्रदेश लखनऊ :— 18 अप्रैल 2021 :  
कोरोना से बचाव के लिए सबसे जरूरी उपाय मास्क को माना गया है। दुनिया भर में मास्क पहनने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मास्क नहीं पहनने पर जुर्माना लगाने के आदेश दिए हैं। सरकार की यह कार्यवाही लोगों को मास्क के प्रति जागरूकता लाने के लिए की जा रही है, ताकि कोरोना के संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके। इसी क्रम में अब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को मास्क बनाने के कार्य से जोड़ा जा रहा है। जिसके चलते कुछ साल पहले तक जो ग्रामीण महिलाएं खुद आर्थिक तंगी की मार झेल रही थी उन्हें अब कोरोना से लोगों को बचाने के लिए मास्क बनाने का कार्य सौंपा गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने इन महिलाओं को मास्क बनाने का काम दिया हैं। ऐसे में अब यूपी के कई जिलों में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की यह महिलाएं सूती व खादी वस्त्रों से दो व तीन लेयर वाले मास्क बना रहीं हैं। सेनेटाइजर और पीपीई किट बनाने के काम भी कर रही हैं।

उ.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक सुजीत कुमार के मुताबिक इस समय 1,208 समूहों से जुड़ी महिलाएं मास्क बनाने का कार्य कर रही हैं। कोरोना संक्रमण के इस दौर में 18 अप्रैल तक इन महिलाओं ने 09 लाख 39 हजार 562 मास्क बना दिए थे। इसके अलावा 17 महिला समूहों ने अब तक 1,248 पीपी किट भी बनाए हैं। इन महिलाओं समूहों को खादी तथा सूती कपड़े मास्क बनाने के लिए मुहैया कराये जा रहे हैं। मास्क किस तरह का बनेगा, इसका डिजाइन भी इन्हें दिया गया है। इन महिलाओं द्वारा बनाए गए मास्क स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग, खाद्य विभाग तथा पुलिस प्रशासन को भी उचित दर पर मुहैया कराने की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में समूहों द्वारा बनाए गए मास्क की मांग अधिक है। बीते वर्ष कोरोना के पहले दौर में उक्त समूहों से जुड़ी महिलाओं ने 1.02 करोड़ मास्क बनाकर बड़ी तादाद में लोगों को कोरोना से बचाने का काम किया था। 50714 पीपीई किट भी महिलाओं ने बनाए थे। इसके साथ ही समूहों की महिलाओं ने पहले दौर में 13675 लीटर सेनेटाइजर बनाकर कोरोना से बचाव की जंग में अहम योगदान दिया था। अब एक बार फिर से ग्रामीण महिलाएं मास्क, सेनेटाइजर और पीपीई किट बनाने के काम में जुट गई हैं। सुजीत कुमार बताते है कि कई अन्य संस्थाओं द्वारा कपड़े का मास्क बड़ी तादाद में तैयार किए जाने के कारण इस बार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल बना है। ऐसे में बड़ी कंपनियां भी इन महिलाओं से मास्क बनवाने के लिए आगे आ रहीं हैं।
सुजीत कुमार के मुताबिक मास्क बना रही एसएचजी की यह महिलाएं और मिशन के कार्यक्रमों से जुडी अन्य महिलाओं ने बीते साल मास्क बनाने के साथ ही 11 जिलों में (सुलतानपुर, सिद्धार्थनगर, मैनपुरी, महोबा, कानपुर नगर, बस्ती, बांदा, बहराइच, बागपत, बाराबंकी और अलीगढ़) अपने स्तर पर गरीब परिवारों में राशन बांट था। तब सवा सौ से अधिक समूह की महिलाओं गरीबों को राशन और पका भोजन मुहैया करवाया था। उनके इस हौसले को और बढ़ाने के लिए विभाग ऐसे समूहों को जोखिम निवारण निधि फंड से आर्थिक मदद की थी। इन महिलाओं के जरिए उक्त 11 जिलों के करीब 130 समूहों की 352 महिलाएं लॉकडाउन के दौरान गरीबों के घर में खाना पहुंचा था। इन महिलाओं के प्रयास से तब उक्त 11 जिलों में कई समूहों ने कम्युनिटी किचन भी चलाया कर लोगों को भोजन मुहैया कराया था। अब इस बार गांव -गांव में लोगों को मास्क मुहैया कराने पर जोर है। जिसके चलते बड़ी संख्या में मास्क बनाने का कार्य किया जा रहा है।

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