प्रदेश की कानून व्यवस्था से तंग आकर पीड़िता ने लगाई फाँसी फाँसी लगाकर आत्महत्या की कोशिश……

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उत्तर प्रदेश जनपद आगरा
द्वारा
दैनिक मधुर दर्पण समाचार
ब्यूरो भुवनेश्वर पासवान

उत्तर प्रदेश जनपद आगरा:–आगरा पीड़िता स्टॉफ क्वार्टर वाटरवर्क्स निवासी मीनाक्षी पुत्री सुरेश कुमार रिटायर्ड फ़ौजी की दूसरी बेटी है। जिसकी शादी तकरीबन 18 वर्ष पूर्व एत्मादपुर थाना के पृथ्वी गढ़ी निवासी शू डिजाइनर भानू प्रताप के साथ हुई थी।भानुप्रताप व मीनाक्षी के दो बेटे शानू 16 व वीर 15 हैँ।शादी के कुछ समय बाद दोनों में दहेज मांगने के कारण अनबन रहने लगी और आये दिन मारपीट होने लगी रोजाना की मारपीट से तंग आकर पीड़िता ने पुलिस व पारिवारिक न्यायालय का सहारा लिया,वहाँ हर्जे खर्चे के रूप में पीड़िता को न्यायालय के आदेश से कुछ रूपये प्रतिमाह मिलने लगे,जिनको पीड़िता अपने दोनों बच्चोँ की पढ़ाई लिखाई और खाने पीने पर खर्च करने लगी कुछ समय तो यह खर्चा मिला लेकिन उसके कुछ समय बाद शातिर किस्म के भानुप्रताप ने खर्चा देना बंद कर दिया और पीड़िता के खिलाफ पारिवारिक न्यायालय में विवाह विच्छेदन की कार्यवाही कर दी काफ़ी दिनों तक दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद विद्वान् न्यायाधीश महोदय ने भानुप्रताप की विवाह विच्छेदन की अर्जी पर फैसला सुनाते हुए दोनों की शादी विच्छेद कर दिया, और इसके बदले में पीड़िता को एक मुस्त पांच लाख रूपये भानू प्रताप द्वारा दिए जाने का भी आदेश दिया,पारिवारिक न्यायालय के इस फैसले से असंतुष्ट हुए भानू प्रताप ने इलाहबाद हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी जिसे माननीय न्यायालय ने वहाँ अस्वीकृत कर दिया,आज के समय में विवाह विच्छेद की यह राशि ऊंट के मुँह में जीरे के समान होते हुए भी पीड़िता को आज तक नहीं मिली,आज पीड़िता और उसके बच्चे भूखों मरने पर आमादा हैं।बीमारी के कारण माँ की हालत खराब है। माँ की इस हालत को देखते हुए दोनों पढ़ाई छोड़कर काम की तलाश में रहते हैँ।लेकिन कोरोना महामारी के कारण बच्चों को कोई काम भी नहीं मिल पा रहा है। दो वक़्त की रोटी के लिए पीड़िता ने कई बार कोर्ट पहुंचकर भानुप्रताप के खिलाफ वसूलयावी वारंट भी जारी करवाये लेकिन इस भृष्ट पुलिस तंत्र से भानुप्रताप की सांठगांठ होने के कारण कोई कार्यवाही नहीं हो सकी,पुलिस के कार्यवाही न करने से तंग आकर पीड़िता ने एक वर्ष पहले सूबे के मुख्यमंत्री योगी जी व प्रधानमंत्री मोदी जी से बच्चों सहित जिला मुख्यालय पर इच्छा मृत्यु (आत्म दाह) करने की इजाजत मांगी थी, ज़ब उक्त घटना संबधित थाने की पुलिस ने न्यूज पेपर में पढ़ी तो तुरंत पीड़िता की ससुराल में से उसके देवर को उठाकर बंद कर दिया था।तब भानू प्रताप ने एक हफ्ते में रूपये जमा करने की थाने में बोलकर अपने भाई को छुड़ा ले गया,उसके बाद कोरोना महामारी बहाना बनाकर आज तक बचता रहा है।पुलिस ने पीड़िता को न्याय दिलाने की जगह परेशान किया और बार बार सम्मन जारी होने पर कार्यवाही करने की बोलकर न्याय से विरक्त कर दिया,ज़ब पुलिस को एक बार माननीय न्यायालय ने सम्मन जारी करके कह दिया कि उक्त भानुप्रताप से पीड़िता के रूपये वसूले जाएँ तो बार बार सम्मन जारी किया जाना जरूरी नहीं होना चाहिए,पीड़िता आर्थिक रूप से परेशान होते हुए भी दूसरों से कर्ज लेकर दर्जनों बार न्यायालय से सम्मन जारी करवाती रही है।लेकिन इनका पुलिस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।अब आर्थिक तंगी व बीमारी से जूझ रही पीड़िता ने न्यायालय व पुलिस के चक्कर काट काट कर थक जाने के कारण तथा दो दिनों से स्वयं व दोनों बेटों के भूखे होने से दुखी होकर फांसी लगाकर आत्महत्या करने का मन बनाकर कमरे में अंदर से दरवाजा बंद करके चुन्नी से फंदा बनाकर पंखे पर लटक गयी,तभी बहार से पीड़िता का बड़ा बेटा शानू आ गया ज़ब उसने अंदर से दरवाजा बंद देखा तो वह रोता हुआ बहार भागा और लोगों को बुलाया तब जाकर लोगों ने पीड़िता को नीचे से उठाकर फंदे को चाकू से काटा, इतनी ही देर में पीड़िता बेहोस हो गयी और दांतो के बीच जीभ आ जाने से जीभ का अगला हिस्सा कट गया पड़ोसी के ऑटो में डालकर निकट के ही अश्वनी सडाना हॉस्पीटल ले जाया गया जहां डॉक्टर ने एडमिट करने से मना करते हुए कहीं दूसरी जगह ले जाने को बोल दिया,तब जाकर सुल्तानगंज की पुलिया पर स्थित एक नर्सिंग होम में एडमिट किया गया,दो दिन एडमिट रहने के बाद पैसे के अभाव के कारण पीड़िता को नर्सिंग होम संचालक द्वारा घर भेज दिया गया जबकि पीड़िता की हालत अभी भी एडमिट होने के लायक थी,आज पीड़िता व उसके दोनों बेटे भूखों मर रहे हैँ। पीड़िता पर रहने को मकान नहीं हैं।पहले माँ थी तो थोड़ा सहारा मिल जाता था। लेकिन अब माँ भी इस दुनियां में नहीं रही उन्हें पित्त की थैली में कैंसर होने के कारण काल ने अपना शिकार बना लिया,क्या इतनी परेशानियों से तंग इस महिला को योगीराज में न्याय मिल पायेगा।क्या योगी जी व मोदी जी का यही सुशासन है।क्या यही महिला सशक्तिकरण है।आखिर पुलिस प्रशासन किस नेता के दबाब में आकर पीड़िता को न्याय नहीं दिलवा पा रहा?आखिर पुलिस न्यायालय के आदेश का पालन करने में क्यों अक्षम हो रही है।जबकि न्यायपालिका के आदेशों का पालन करना पुलिस की सबसे पहली जिम्मेदारी है।यदि पीड़ित को न्याय नहीं मिला तो वह इस घटना की पुनरावृति भी कर सकती है।

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